ग़ज़ल और गीत की दुनिया में स्वागत है आपका ! अपने एहसास आप तक पहुंचा रही हूँ अपनी लिखी ग़ज़लों और गीतों के माध्यम से ...आशा है आप सबका प्यार मेरी रचनाओं को मिलेगा |
Saturday, 7 February 2015
ग़ज़ल #8
चाँद
बेकल, चाँदनी बेनूर सी खलने लगी
रात
भी अब ख़्वाहिशों की क़ब्र सी लगने लगी
फिर
कहीं टूटा सितारा, ख़्वाब
कोई दे गया
नज़्म
इक बेचैन सी,
अल्फ़ाज़
में ढलने लगी
इस
कदर तुझसे मुहब्बत हो गई ऍ हमनवाँ
याद
जब तुझको किया, तन्हाई
भी हँसने लगी
ज़िक्र
भी तेरा हुआ महफ़िल में गैरो की अगर
गैर
अपने से लगे ,महफ़िल
वही सजने लगी
बात
दिल की जो जुबाँ से कह नहीं पाएं 'किरण'
बात
चुपके से तेरी तस्वीर वो करने लगी
©विनिता सुराना 'किरण'
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