बिखरते है संवरते है दिलों में फिर भी पलते हैं ।
ये ख़्वाबों के परिंदे है उड़ाने रोज़ भरते हैं।
संभाले है मरासिम ये बहुत अरमान से लेकिन
दुखाते हैं बहुत दिल को कभी जब वार करते हैं ।
कभी वादे किये तुमने भुला बैठे हो पल भर में
भरम ये जो वफ़ा का है न टूटे अब यूँ डरते हैं ।
धड़कने से अगर दिल के यकीं हो जाए जीने का
सम्भालो दिल तुम्हें दे के चलो हम आज मरते हैं ।
ख़ुशी के चार पल काफ़ी गमों के जब अँधेरे हो
‘किरण’ इक आस की चमके हज़ारों दीप जलते हैं ।
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