Saturday, 26 July 2014

वो आहट (नव गीत) मेरी आवाज़ में

अनदेखे अनजाने से
मन के सूने गलियारों में
पहचाने से क़दमों की
वो आहट अक्सर सुनती हूँ |

थम जाती है साँसें भी
सुनने को सरगम मीठी सी
रंगों की महफ़िल सजती
तब ख्व़ाब सुनहरे बुनती हूँ |

लहरें बीते लम्हों की
जब तटबंधों को छू जाती
तभी ह्रदय-सागर से मैं
यादों के मोती चुनती हूँ |

चक्र समय का चलता जब
ऋतुएँ बदले मौसम बदले
नैनों की बंजर धरती

पर सूखे आँसू धुनती हूँ |  
©विनिता सुराना 'किरण'

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