Friday, 1 June 2018

ग़ज़ल # 66

दिल में सारे अफ़साने रख।

ग़ैरों से पर अनजाने रख।


नींद सुकूँ सब हासिल होंगे,

कुछ ख़्वाब हसीं सिरहाने रख।


अंगारों की खेती करता,

हाथों में तो दस्ताने रख।


जीना गर आसान नहीं है,

दीवानों से याराने रख।


हाल 'किरण' पूछेंगे सारे,

तू दोस्त मगर पहचाने रख।

©विनीता किरण

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