मुसाफिर है सभी जग में, ज़रा दो पल ठहर जाओ।
मिली फुर्सत न बरसो से, ज़रा दो पल ठहर जाओ।
कभी साज़िश थी किस्मत की, कभी सूरत न मिलने की,
मुहब्बत की गुजारिश ये, ज़रा दो पल ठहर जाओ।
कली चटकी, उडी तितली, सजाए रंग कुदरत ने,
खिलाए फूल भवरों ने, ज़रा दो पल ठहर जाओ।
तुम्हें पाने की ख़्वाहिश में, भटकते हैं ज़माने से,
मिला है साथ, कब छूटे, ज़रा दो पल ठहर जाओ।
मिली मोहलत है थोड़ी सी, बने सूरत तो मिलने की,
'किरण' ये साँस भी रूठे, ज़रा दो पल ठहर जाओ।
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