ग़ज़ल # 3
साहिल पर कब तक भटकेंगे
मिलने को यूँ ही तरसेंगे
शबनम के कतरे आँखों में
क्या फिर ये बादल बरसेंगे
चिंगारी दिल में सुलगी है
मत छेड़ो शोले भड़केंगे
मिलने आई यादें जिस दिन
सहरा में भी गुल महकेंगे
भरने दो परवाज़ 'किरण' अब
पंछी भी खुल कर चहकेंगे
©विनिता सुराना 'किरण'
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