Sunday, 3 April 2016

ग़ज़ल # 36

मिलने आएँ रंग सुनहरे, तुम आओ।
तोड़ सको तो तोड़ के पहरे, तुम आओ।

भीगा हो आलम, दीवानी सी लहरें ,
एहसासों के सागर गहरे, तुम आओ।

गूँजे दिलकश प्रेम-तराने, दिल सुन लें,
दुनिया से हो जाएं बहरे, तुम आओ।

आँखें मूँदे, इक दूजे में खो जाएँ,
धुंधले हो जाएँ सब चेहरे, तुम आओ।

शाम ढ़ले, जब 'किरण' बहकती लहरों सी,
शब भी जब कुछ पल को ठहरे, तुम आओ।
©विनीता सुराना 'किरण'

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