Friday, 29 April 2016

ग़ज़ल # 39

मिले फुर्सत जो थोड़ी, देख लेना।
मुहब्बत भी जरूरी, देख लेना।

रहे हैं फ़ासले यूँ दरमियाँ भी,
मिटा कर आज दूरी, देख लेना।

हमें चाहत है किसकी, जानना हो,
ज़रा तुम आइना ही देख लेना।

नज़ारे ख़ूबसूरत हैं यक़ीनन,
ज़रा मुड़ कर हमें भी देख लेना।

सितारे यूँ तो फ़ाख़िर है 'किरण' तुम,
चरागों का हुनर भी देख लेना।
©विनीता सुराना 'किरण'

*फ़ाख़िर - फ़ख्र करने लायक

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