सफ़र तन्हा सही पर गम नहीं है।
दुआ भी दोस्तों की कम नहीं है।
दुआ भी दोस्तों की कम नहीं है।
मिलो तो मुस्कुरा कर सबसे मिलना,
सभी के पास तो हमदम नहीं है।
सभी के पास तो हमदम नहीं है।
ख़ुशी रहती किताबों में ही शायद,
है कोई आँख, जो अब नम नहीं है।
है कोई आँख, जो अब नम नहीं है।
कोई मंज़िल नहीं आसान होती,
बता किस रास्ते पर ख़म* नहीं है।
बता किस रास्ते पर ख़म* नहीं है।
ख़ुशी देकर ख़ुशी मिलती 'किरण' को,
कहा किसने कि वो ख़ुर्रम** नहीं है।
©विनीता सुराना 'किरण'
कहा किसने कि वो ख़ुर्रम** नहीं है।
©विनीता सुराना 'किरण'
* ख़म - टेढ़ापन
** ख़ुर्रम - ख़ुश
** ख़ुर्रम - ख़ुश
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