दिल की है सदा भी वो।
मेरा हमनवा भी वो।
आशना है उससे दिल,
दिल का आसरा भी वो।
अब गिला भी क्या करूँ,
दर्द भी दवा भी वो।
याद और कुछ नहीं,
मेरी हर दुआ भी वो।
ज़िन्दगी है ख़ुशनुमा,
हमसफ़र, सखा भी वो।
कद्रदान है मेरा,
और आइना भी वो।
मैं 'किरण' वो आफ़ताब,
शब में है ज़िया भी वो।
©विनीता सुराना किरण
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