Tuesday, 23 August 2016

ग़ज़ल # 49

कुछ तो बोलो यूँ चुप रहोगे क्या?
जो पुकारा तो संग चलोगे क्या?

किसने बाँधा, हदों में दिल का जहां,
तुम मुहब्बत की हद बनोगे क्या?

ख़्वाब कितने बुने हैं आंखों ने,
तुम भी कुछ ख़्वाब संग बुनोगे क्या?

कितने अहसास, दफ़्न हैं दिल में,
बाँध टूटा तो थाम लोगे क्या?

ज़िन्दगी कट गयी सफ़र में 'किरण',
पल दो पल का सुकूँ बनोगे क्या?

©विनीता सुराना 'किरण'

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