Wednesday, 26 October 2016

ग़ज़ल#52

दोस्तों पर यकीं सदा रखना।
हाँ मगर साथ आइना रखना।

जाने किस रूप में रक़ीब मिले
अपने साये से फ़ासला रखना।

सबसे पूछा तो उलझनें होंगी,
एक दो से ही मशविरा रखना।

आँधियाँ भी गुज़र ही जाएंगी,
बस यही मन में हौसला रखना।

हक़ है तो मिल ही जाएगा तुझको,
हाँ 'किरण' कोशिशें सदा रखना।
©विनीता सुराना 'किरण'

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