क्या ज़ुबाँ पर है, दिल में रखते क्या?
जो भी कहते हो, यूँ ही कहते क्या?
अब क्या दिन में भी चाँद निकले,
सब तुम्हारे कहे पे चलते क्या ?
जाने किन गफलतों में जीते हो,
दिन सभी एक जैसे रहते क्या?
कुछ तो औरों ने भी किया हासिल,
बस तुम्हीं सब कमाल करते क्या?
कल तलक झूठ, आज सच है 'किरण'
बात पर भी कभी ठहरते क्या ?
@विनीता सुराणा किरण
No comments:
Post a Comment